ओम का नियम :

जब आप वैज्ञानिक खोज करते हैं तो क्या होता हैआपके नाम पर एक कानून बनता है! वोल्टेजकरंटऔर रेजिस्टेंस बिजली के सभी भाग हैं जो एक दूसरे को प्रभावित करते हैं। जॉर्ज ओहम नाम के एक वैज्ञानिक ने पता लगाया कि ये तीन चीजें किस तरह से संबंधित हैं और यह ओम के नियम के रूप में जाना जाता है।

ओम के नियम का इतिहास :

जॉर्ज साइमन ओम जॉर्ज साइमन ओम (16 मार्च 1789 - 6 जुलाई 1854) प्रसिद्ध भौतिकशास्त्री थे। उन्होने ही विद्युत चालकों के एक सामन्य गुण (प्रतिरोध) की खोज की और 'ओम का नियमप्रतिपादित किया।

कई वैज्ञानिकों की तरहओह्म ने अन्य वैज्ञानिकों द्वारा किए गए काम पर विस्तार किया जो उनसे पहले आए थे। 1825 से 1827 के मध्यउन्होंने कई प्रयोग किए और उस सूत्र के साथ आएजो वोल्टेजकरंट और प्रतिरोध के बीच संबंध की व्याख्या करता हैजो इलेक्ट्रिकल सर्किट के अध्ययन में बहुत महत्वपूर्ण हो गया। उस समयवैज्ञानिक इस सूत्र से सहमत नहीं थे। हालांकिकई वर्षों बादउन्हें ओम के निष्कर्षों कि आवश्यकता का एहसास हुआऔर ओम का नियम बहुत प्रसिद्ध हो गया।

ओम के नियम (Ohm's Law) कि परिभाषा :

ओम के नियम (Ohm's Law) के अनुसार यदि ताप आदि भौतिक अवस्थायें नियत रखीं जाए तो किसी प्रतिरोधक (याअन्य ओमीय युक्ति) के सिरों के बीच उत्पन्न विभवान्तर उससे प्रवाहित धारा के समानुपाती होता है।

अर्थात् V I

वोल्टेज (V) = धारा (I) × प्रतिरोध (R)

                         यहाँ 

                V = विभान्तर (Voltage), Volts में

                                 I = धाराकरंट एम्पियर में

                                 R = प्रतिरोध ओह्म में (Resistance)

नोट:इस नियम का उपयोग केवल डीसी परिपथ में किया जाता है, AC Circuit में नहीं ।